सत्य असत्य क्या है

सत्य का मतलब जो सत्य है जो सही है और असत्य का मतलब है जो सही नहीं है जनरल यही माना गया है लेकिन सनातन धर्म में उनकी व्याख्या इस तरह है जो चीज को जीवित रखती है उनके लिए आपका होना जरूरी है वह सत्य है वहां असत्य है आपके बिना भी जो चीज हो सकती हैं वह सत्य है क्योंकि उसमें आपकी जरूरत नहीं है अगर मैं बड़ी-बड़ी बात करूं तो सबसे चीज वही है जो चीज आप के बिना भी चल सकती है उसके सत्य कहा गया है और जिसको आपकी जरूरत है उसको असत्य कहा गया है यही सिद्धांत को 4 लोगों ने अपने फायदे के लिए उसको मैनिपुलेट किया है

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